मेरी जिंदगी में एक ऐसा शबाब आया खत लिखा जवानी में बुढ़ापे में जवाब आया
उठा लो दुपट्टे जमी से कहीं दाग लग न जाए पर्दे में हो पर्दे में ही रहो कहीं आग लग न जाए
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